मैं हूँ सनातनी और है वेदान्त मेरी भाषा
उपनिषद् है ग्रन्थ मेरे, गीता मेरी वाचा
पूर्ण सनातन अखंड जो है
बीज कारण श्रुष्टि का
परब्रह्म - वह परमात्मा
पिता उसे मैं पाता
अनंत शक्ति जो कार्यान्वित
सर्जन, पालन, संहार में
त्रिगुणात्मक त्रिगुणेश्वरी
वह है मेरी माता
श्री नारायण जो देह धरकर
प्रगट होते ईस धरती पर
राम कृष्ण शिव ठाकुर रूप
इश्वर का गुण मैं गाता
व्यास बुद्ध महावीर शंकर
माधव रामानुज निम्बर्क
विविध दर्शनों में ईनके मैं
ब्रह्म का ही पथ पाता
वीर नरेन्द्र विवेकानंद
रमण अरविन्द चिन्मयानन्द
योगी शिवानन्द - आदि गुरु के
शरण में आनंद पाता
सीता सावित्री मैत्रेयि
माँ शारदा राधा मीरा
मातृशक्ति के रूप देख
हर स्त्री को शीष झुकाता
नचिकेता प्रहलाद ध्रुव
श्रवण आदि को नमन कर
सोचता हर बालक में
छिपा है ब्रह्म का ज्ञाता
भक्ति ज्ञान सेवा सत्संग
त्याग आदि है शस्त्र मेरे
इन शस्त्रों से मोह द्वंद्व की
जाल से मुक्ति पाता
भारतवर्ष है आँगन मेरा
और विश्व है मेरा गाँव
सब की शान्ति और सुख में ही
मैं अपने श्रेय को पाता
मैं हूँ सनातनी और है वेदान्त मेरी भाषा
उपनिषद् है ग्रन्थ मेरे, गीता मेरी वाचा